भगवान श्री कृष्ण सौंदर्य और प्रेम के देवता हैं। उनकी हर अदा निराली और मधुर है।
इसी मधुरता को “मधुराष्टकम” में बहुत सुंदर ढंग से बताया गया है। इसकी रचना महाप्रभु वल्लभाचार्य जी ने की थी।
यह स्तोत्र बताता है कि कान्हा का सब कुछ मधुर है। उनकी मुस्कान, उनकी चाल और उनका बोलना भी मीठा है।
जब हम इसे सुनते हैं, तो हृदय आनंद से भर जाता है। यह हमें भक्ति की एक नई दुनिया में ले जाता है।
मशहूर शास्त्रीय गायिका एम.एस. सुब्बुलक्ष्मी (M.S. Subbulakshmi) जी ने इसे अपनी दिव्य आवाज़ दी है।
उनके स्वर ने इस पाठ को पूरी दुनिया में लोकप्रिय बना दिया। उनकी आवाज़ में यह भजन सीधे भगवान के चरणों तक पहुँचाता है।
आप इस पाठ को प्रतिदिन सुबह कर सकते हैं।
यहाँ दिए गए Madhurashtakam Lyrics आपकी बहुत मदद करेंगे। आइये, इस मधुर स्तुति के बोल पढ़ते हैं और श्री कृष्ण की भक्ति में खो जाते हैं।
जय श्री कृष्ण!
Madhurashtakam Lyrics’s Detail – विवरण
| जानकारी (Details) | विवरण (Description) |
| भजन का नाम | मधुराष्टकम (Madhurashtakam) |
| रचयिता (Composer) | श्री वल्लभाचार्य (Vallabhacharya) |
| प्रसिद्ध गायिका | एम.एस. सुब्बुलक्ष्मी (M.S. Subbulakshmi) |
| मुख्य देवता | भगवान श्री कृष्ण (Lord Krishna) |
| भाषा | संस्कृत (Sanskrit) |
| शैली (Genre) | भक्ति / शास्त्रीय (Devotional) |
| मुख्य संदेश | श्री कृष्ण की हर लीला मधुर है |
Madhurashtakam Lyrics with Hindi Meaning
अधरं मधुरं वदनं मधुरं
नयनं मधुरं हसितं मधुरं।
हृदयं मधुरं गमनं मधुरं
मधुराधिपते रखिलं मधुरं।।
अर्थ:
भगवान श्रीकृष्ण के अधर (होठ) मधुर हैं, उनका मुख मधुर है।
उनकी आँखें मधुर हैं और उनकी मुस्कान भी मधुर है।
उनका हृदय मधुर है, उनका चलना भी मधुर है।
हे मधुरता के स्वामी! आपका सब कुछ मधुर है।
वचनं मधुरं चरितं मधुरं
वसनं मधुरं वलितं मधुरं।
चलितं मधुरं भ्रमितं मधुरं
मधुराधिपते रखिलं मधुरं।।
अर्थ:
श्रीकृष्ण के वचन मधुर हैं, उनका चरित्र मधुर है।
उनके वस्त्र मधुर हैं और उनकी चाल भी मधुर है।
उनका चलना-फिरना मधुर है, उनका भ्रमण करना भी मधुर है।
हे मधुरता के स्वामी! आपका सब कुछ मधुर है।
वेणुर्मधुरो रेणुर्मधुरः
पाणिर्मधुरः पादौ मधुरौ।
नृत्यं मधुरं सख्यं मधुरं
मधुराधिपते रखिलं मधुरं।।
अर्थ:
श्रीकृष्ण की बाँसुरी मधुर है और वृंदावन की धूल भी मधुर है।
उनके हाथ मधुर हैं और उनके चरण भी मधुर हैं।
उनका नृत्य मधुर है और उनकी मित्रता भी मधुर है।
हे मधुरता के स्वामी! आपका सब कुछ मधुर है।
गीतं मधुरं पीतं मधुरं
भुक्तं मधुरं सुप्तं मधुरं।
रूपं मधुरं तिलकं मधुरं
मधुराधिपते रखिलं मधुरं।।
अर्थ:
श्रीकृष्ण का गीत मधुर है, उनका पान करना मधुर है।
उनका भोजन करना मधुर है और उनका सोना भी मधुर है।
उनका रूप मधुर है और उनका तिलक भी मधुर है।
हे मधुरता के स्वामी! आपका सब कुछ मधुर है।
करणं मधुरं तरणं मधुरं
हरणं मधुरं रमणं मधुरं।
वमितं मधुरं शमितं मधुरं
मधुराधिपते रखिलं मधुरं।।
अर्थ:
श्रीकृष्ण के कार्य मधुर हैं, उनका उद्धार करना मधुर है।
उनका हरण करना और प्रेमपूर्ण व्यवहार भी मधुर है।
उनका त्याग मधुर है और उनका शांत करना भी मधुर है।
हे मधुरता के स्वामी! आपका सब कुछ मधुर है।
गुञ्जा मधुरा माला मधुरा
यमुना मधुरा वीची मधुरा।
सलिलं मधुरं कमलं मधुरं
मधुराधिपते रखिलं मधुरं।।
अर्थ:
श्रीकृष्ण की गुञ्जा माला मधुर है।
यमुना नदी मधुर है और उसकी लहरें भी मधुर हैं।
उसका जल मधुर है और उसमें खिला कमल भी मधुर है।
हे मधुरता के स्वामी! आपका सब कुछ मधुर है।
गोपी मधुरा लीला मधुरा
युक्तं मधुरं मुक्तं मधुरं।
दृष्टं मधुरं सृष्टं मधुरं
मधुराधिपते रखिलं मधुरं।।
अर्थ:
गोपियाँ मधुर हैं और श्रीकृष्ण की लीलाएँ मधुर हैं।
उनका मिलन मधुर है और उनका विरह भी मधुर है।
जो कुछ देखा जाता है वह मधुर है और जो सृष्टि उन्होंने बनाई वह भी मधुर है।
हे मधुरता के स्वामी! आपका सब कुछ मधुर है।
गोपा मधुरा गावो मधुरा
यष्टिर्मधुरा सृष्टिर्मधुरा।
दलितं मधुरं फलितं मधुरं
मधुराधिपते रखिलं मधुरं।।
अर्थ:
ग्वालबाल मधुर हैं और गौएँ भी मधुर हैं।
श्रीकृष्ण की लाठी मधुर है और उनकी सृष्टि भी मधुर है।
उनका दुष्टों का विनाश करना मधुर है और उसके फल भी मधुर हैं।
हे मधुरता के स्वामी! आपका सब कुछ मधुर है।
Madhurashtakam Lyrics – Hinglish
adharaṃ madhuraṃ vadanaṃ madhuraṃ
nayanaṃ madhuraṃ hasitaṃ madhuram ।
hṛdayaṃ madhuraṃ gamanaṃ madhuraṃ
madhurādhipatērakhilaṃ madhuram ॥ 1 ॥
vachanaṃ madhuraṃ charitaṃ madhuraṃ
vasanaṃ madhuraṃ valitaṃ madhuram ।
chalitaṃ madhuraṃ bhramitaṃ madhuraṃ
madhurādhipatērakhilaṃ madhuram ॥ 2 ॥
vēṇu-rmadhurō rēṇu-rmadhuraḥ
pāṇi-rmadhuraḥ pādau madhurau ।
nṛtyaṃ madhuraṃ sakhyaṃ madhuraṃ
madhurādhipatērakhilaṃ madhuram ॥ 3 ॥
gītaṃ madhuraṃ pītaṃ madhuraṃ
bhuktaṃ madhuraṃ suptaṃ madhuram ।
rūpaṃ madhuraṃ tilakaṃ madhuraṃ
madhurādhipatērakhilaṃ madhuram ॥ 4 ॥
karaṇaṃ madhuraṃ taraṇaṃ madhuraṃ
haraṇaṃ madhuraṃ smaraṇaṃ madhuram ।
vamitaṃ madhuraṃ śamitaṃ madhuraṃ
madhurādhipatērakhilaṃ madhuram ॥ 5 ॥
guñjā madhurā mālā madhurā
yamunā madhurā vīchī madhurā ।
salilaṃ madhuraṃ kamalaṃ madhuraṃ
madhurādhipatērakhilaṃ madhuram ॥ 6 ॥
gōpī madhurā līlā madhurā
yuktaṃ madhuraṃ muktaṃ madhuram ।
dṛṣṭaṃ madhuraṃ śiṣṭaṃ madhuraṃ
madhurādhipatērakhilaṃ madhuram ॥ 7 ॥
gōpā madhurā gāvō madhurā
yaṣṭi rmadhurā sṛṣṭi rmadhurā ।
dalitaṃ madhuraṃ phalitaṃ madhuraṃ
madhurādhipatērakhilaṃ madhuram ॥ 8 ॥
॥ iti śrīmadvallabhāchāryavirachitaṃ madhurāṣṭakaṃ sampūrṇam ॥
निष्कर्ष
भगवान श्री कृष्ण की लीला बहुत निराली है। यह पाठ हमें यही सिखाता है। कान्हा हमेशा अपने भक्तों का ध्यान रखते हैं।
वे बहुत दयालु हैं। जो भी सच्चे मन से उन्हें याद करता है, उसे सुख मिलता है। श्री कृष्ण की भक्ति से जीवन सफल होता है।
एम.एस. सुब्बुलक्ष्मी जी ने इसे बहुत सुंदर गाया है। उनका संगीत बहुत मधुर है। यह भजन हर भक्त के दिल को छूता है।
जन्माष्टमी या किसी भी शुभ दिन पर इसे सुनना बहुत अच्छा होता है। आप इसे अपनी रोज की पूजा में भी शामिल करें।
हमें उम्मीद है कि यहाँ दिए गए बोल आपकी मदद करेंगे। यहाँ दिए गए Madhurashtakam Lyrics आपकी भक्ति को और गहरा बनाएंगे।
इसे पढ़कर मन को बहुत शांति मिलेगी। श्री कृष्ण का आशीर्वाद हमेशा आप पर बना रहे।
जय श्री कृष्ण!
